श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.35.16 
पाशोपधानां ज्यातन्त्रीं चापदण्डां महास्वनाम्।
शरवर्णां धनुर्वीणां शत्रुमध्ये प्रवादय॥ १६॥
 
 
अनुवाद
आज शत्रुओं के बीच गूँजने वाली धनुषरूपी वीणा बजाओ। पाश उसकी खूँटियाँ हैं, धनुष उसकी डोरी है, धनुष उसका दण्ड है और बाण उससे निकलने वाला स्वर है।॥16॥
 
‘Today, play the bow-like veena that resounds loudly among the enemies. The noose (loop) is its pegs, the bow is its string, the bow is its staff and the arrow is the swara (sound) that emanates from it.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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