श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.35.12 
त्वया परिषदो मध्ये श्लाघते स नराधिप:।
पुत्रो ममानुरूपश्च शूरश्चेति कुलोद्वह:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वह आपसे प्रभावित होकर सभा में आपकी बहुत प्रशंसा करता है और कहता है, 'यह मेरा पुत्र उत्तर मेरे समान वीर योद्धा है और इस वंश का भार वहन करने में समर्थ है।॥12॥
 
He is impressed by you and speaks highly of you in the assembly. He says, 'This son of mine, Uttara, is a brave warrior like me and is capable of carrying the burden of this dynasty.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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