श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.35.11 
राजपुत्र हितप्रेप्सु: क्षिप्रं निर्याहि च स्वयम्।
त्वां हि मत्स्यो महीपाल: शून्यपालमिहाकरोत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार! आप इस राज्य के हितैषी हैं, अतः युद्ध की तैयारी करके बाहर आ जाइए। मत्स्यनारायण ने अपनी अनुपस्थिति में आपको इस स्थान का रक्षक नियुक्त किया है।
 
Prince! You are a well wisher of this kingdom, so prepare yourself for the war and come out. Matsyanarayana has appointed you as the protector of this place in his absence.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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