श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.35.1 
वैशम्पायन उवाच
याते त्रिगर्तान् मत्स्ये तु पशूंस्तान् वै परीप्सति।
दुर्योधन: सहामात्यो विराटमुपयादथ॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं, 'हे जनमेजय! जिस समय राजा विराट अपने गौवंश को बचाने के लिए त्रिगर्तों से युद्ध करने गए थे, उसी समय दुर्योधन ने अपने मंत्रियों के साथ विराट देश पर आक्रमण कर दिया।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! At the time when King Virata went to fight with the Trigartas in order to rescue his cattle, at the same time Duryodhan, along with his ministers, attacked the country of Virata.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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