श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 34: राजा विराटद्वारा पाण्डवोंका सम्मान, युधिष्ठिरद्वारा राजाका अभिनन्दन तथा विराटनगरमें राजाकी विजयघोषणा  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  4.34.9-10 
ततोऽब्रवीत् प्रीतमना मत्स्यराजो युधिष्ठिरम्।
पुनरेव महाबाहुर्विराटो राजसत्तम:॥ ९॥
एहि त्वामभिषेक्ष्यामि मत्स्यराजस्तु नो भवान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब मत्स्य देश के राजा विराट ने मन ही मन अत्यन्त प्रसन्न होकर युधिष्ठिर से पुनः कहा- 'कंकजी! आइए, मैं आपका अभिषेक करूँगा। आप हमारे मत्स्य देश के राजा बनिए।॥9-10॥
 
Then the great king of Matsyas, Virat, the king of the Matsyas, being very happy in his heart, said to Yudhishthira again- 'Kankaji! Come, I will anoint you. You become the king of our Matsya country.॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)