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श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 34: राजा विराटद्वारा पाण्डवोंका सम्मान, युधिष्ठिरद्वारा राजाका अभिनन्दन तथा विराटनगरमें राजाकी विजयघोषणा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.34.8 
प्रतिनन्दाम ते वाक्यं सर्वं चैव विशाम्पते।
एतेनैव प्रतीता: स्म यत् त्वं मुक्तोऽद्य शत्रुभि:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'महाराज! आप जो कहते हैं वह सही है। हम आपकी सभी बातों की कद्र करते हैं, लेकिन हमें इस बात से संतोष है कि आज आप अपने शत्रुओं से मुक्त हो गए।'
 
‘Maharaj! What you say is correct. We appreciate all your words, but we are satisfied with the fact that you have been freed from your enemies today.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)