vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 34: राजा विराटद्वारा पाण्डवोंका सम्मान, युधिष्ठिरद्वारा राजाका अभिनन्दन तथा विराटनगरमें राजाकी विजयघोषणा
»
श्लोक 8
श्लोक
4.34.8
प्रतिनन्दाम ते वाक्यं सर्वं चैव विशाम्पते।
एतेनैव प्रतीता: स्म यत् त्वं मुक्तोऽद्य शत्रुभि:॥ ८॥
अनुवाद
'महाराज! आप जो कहते हैं वह सही है। हम आपकी सभी बातों की कद्र करते हैं, लेकिन हमें इस बात से संतोष है कि आज आप अपने शत्रुओं से मुक्त हो गए।'
‘Maharaj! What you say is correct. We appreciate all your words, but we are satisfied with the fact that you have been freed from your enemies today.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×