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श्लोक  4.34.6 
युष्माकं विक्रमादद्य मुक्तोऽहं स्वस्तिमानिह।
तस्माद् भवन्तो मत्स्यानामीश्वरा: सर्व एव हि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आज मैं आपके पराक्रम के कारण ही शत्रुओं के चंगुल से सुरक्षित यहाँ आ पाया हूँ। अतः आप सभी मत्स्य देश के स्वामी हैं।
 
Today I have come here safely from the clutches of the enemy only because of your valour. Therefore you all are the masters of Matsya country. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)