श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 34: राजा विराटद्वारा पाण्डवोंका सम्मान, युधिष्ठिरद्वारा राजाका अभिनन्दन तथा विराटनगरमें राजाकी विजयघोषणा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.34.18 
वादित्राणि च सर्वाणि गणिकाश्च स्वलंकृता:।
एतां चाज्ञां तत: श्रुत्वा राज्ञा मत्स्येन नोदिता:।
तामाज्ञां शिरसा कृत्वा प्रस्थिता हृष्टमानसा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सब प्रकार के बाजे बजने चाहिए और वेश्याएँ भी सज-धजकर तैयार होनी चाहिए।’ मत्स्यराज की यह आज्ञा सुनकर दूत उसे स्वीकार करके प्रसन्नतापूर्वक चले गए॥18॥
 
Let all kinds of musical instruments be played and let the prostitutes also be well-dressed and ready.' On hearing this command of the King of Matsyas, the messengers accepted it and left happily.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)