श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 34: राजा विराटद्वारा पाण्डवोंका सम्मान, युधिष्ठिरद्वारा राजाका अभिनन्दन तथा विराटनगरमें राजाकी विजयघोषणा  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  4.34.15-16 
गच्छन्तु दूतास्त्वरितं नगरं तव पार्थिव॥ १५॥
सुहृदां प्रियमाख्यातुं घोषयन्तु च ते जयम्।
ततस्तद्वचनान्मत्स्यो दूतान् राजा समादिशत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘महाराज! अब दूतगण आपके नगर में जाकर आपके मित्रों को यह शुभ समाचार सुनाएँ। वे दूत वहाँ आपकी विजय की घोषणा करें।’ तब उनकी आज्ञा के अनुसार राजा विराट ने दूतों को आदेश दिया-॥15-16॥
 
‘Maharaj! Now messengers should immediately go to your city to convey this good news to your friends. Those messengers should announce your victory there.’ Then as per their instructions, King Virat ordered the messengers -॥ 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)