श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 34: राजा विराटद्वारा पाण्डवोंका सम्मान, युधिष्ठिरद्वारा राजाका अभिनन्दन तथा विराटनगरमें राजाकी विजयघोषणा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.34.13 
त्वत्कृते ह्यद्य पश्यामि राज्यं संतानमेव च।
यतश्च जातसंरम्भो न च शत्रुवशं गत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे ही कारण आज मैं अपने राज्य और सन्तानों का मुख देख सकूँगा; क्योंकि पकड़े जाने पर मैं भयभीत था, परन्तु तुम्हारे पराक्रम के कारण शत्रुओं के अधीन नहीं हुआ।॥13॥
 
It is because of you that I will be able to see the face of my kingdom and children today; because I was afraid when I was caught, but due to your valour I was not subjugated by the enemy.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)