| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 33: » श्लोक 57-58 |
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| | | | श्लोक 4.33.57-58  | प्रोवाच पुरुषव्याघ्रो भीममाहवशोभिनम्॥ ५७॥
तं राजा प्राहसद् दृष्ट्वा मुच्यतां वै नराधम:।
एवमुक्तोऽब्रवीद् भीम: सुशर्माणं महाबलम्॥ ५८॥ | | | | | | अनुवाद | | भीमसेन युद्ध में बड़े ही शोभायमान थे। सुशर्मा को उस अवस्था में देखकर महाराज युधिष्ठिर हँस पड़े और भीमसेन से बोले, ‘इस दुष्ट को छोड़ दो।’ उनके ऐसा कहने पर भीमसेन ने महाबली सुशर्मा से कहा। 57-58। | | | | Bhima was very graceful in battle. The great king Yudhishthira laughed on seeing Susharma in that condition and said to Bhimasena, 'Leave this wretch.' On his saying so, Bhima spoke to the mighty Susharma. 57-58. | | ✨ ai-generated | | |
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