vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 33:
»
श्लोक 48
श्लोक
4.33.48
अभिद्रुत्य सुशर्माणं केशपक्षे परामृशत्।
समुद्यम्य तु रोषात् तं निष्पिपेष महीतले॥ ४८॥
अनुवाद
सुशर्मा के पास पहुँचकर भीम ने क्रोध में आकर उसके केश पकड़ लिए और उसे उठाकर भूमि पर पटक दिया। फिर उसे वहीं रगड़ने लगे। 48.
Reaching Susarma, Bhima caught hold of his hair and in anger picked him up and threw him on the ground. Then he started rubbing him there. 48.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×