श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 33:  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  4.33.36-37h 
ततो युधिष्ठिरो राजा त्वरमाणो महारथ:॥ ३६॥
अभिपत्य सुशर्माणं शरैरभ्याहनद् भृशम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली राजा युधिष्ठिर ने भी बड़ी शीघ्रता से सुशर्मा पर आक्रमण किया और उसे बार-बार बाणों से बींधना आरम्भ कर दिया।
 
Thereafter the mighty warrior King Yudhishthira also attacked Susarma with great haste and began piercing him with arrows repeatedly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)