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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 33:
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श्लोक 12
श्लोक
4.33.12
मत्स्यराज: परामृष्टस्त्रिगर्तेन सुशर्मणा।
तं मोचय महाबाहो न गच्छेद् द्विषतां वशम्॥ १२॥
अनुवाद
महाबाहो! त्रिगर्तराज सुशर्मा ने राजा मत्स्य को बंदी बना लिया है। उसे शीघ्र छोड़ दो, जिससे वह शत्रुओं के हाथ न पड़े॥12॥
‘Mahabaho! King of Trigarta Susharma has captured King Matsya. Release him quickly so that he does not fall into the hands of the enemies.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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