vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 32: मत्स्य तथा त्रिगर्तदेशीय सेनाओंका परस्पर युद्ध
»
श्लोक 24
श्लोक
4.32.24
तौ व्यवाहरतां तत्र महात्मानौ महाबलौ।
अन्योन्यमभिगर्जन्तौ गोष्ठेषु वृषभाविव॥ २४॥
अनुवाद
वे दोनों अत्यन्त बलवान और महान् हृदय वाले वीर गर्जना करते हुए एक दूसरे पर इस प्रकार आक्रमण करने लगे, मानो गौशाला में दो बैल लड़ रहे हों।
Both those very strong and great-hearted heroes roared and attacked each other as if two bulls were fighting in a cowshed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×