श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 32: मत्स्य तथा त्रिगर्तदेशीय सेनाओंका परस्पर युद्ध  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  4.32.15-16 
रथिनां रथिभिश्चात्र सम्प्रहारोऽभ्यवर्तत॥ १५॥
सादिभि: सादिनां चापि पदातीनां पदातिभि:।
उपाशाम्यद् रजो भौमं रुधिरेण प्रसर्पता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रथियों और सारथियों में, घुड़सवारों और पैदलों में भयंकर युद्ध होने लगा। सर्वत्र रक्त की धाराएँ बहने लगीं और पृथ्वी की धूल उसमें भीगकर शांत हो गई॥15-16॥
 
There a fierce battle began between charioteers and charioteers, horsemen and footmen and footmen. Streams of blood flowed everywhere and the dust of the earth became still after getting soaked in it.॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)