श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 31: चारों पाण्डवोंसहित राजा विराटकी सेनाका युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  4.31.d1 
(तत: शब्दो महानासीद् रेणुश्च दिवमस्पृशत्।
शङ्खदुन्दुभिघोषश्च भेरीणां च महास्वन:॥
गवाश्वरथनागानां नराणां च पदातिनाम्।
 
 
अनुवाद
इससे उस समय बड़ा कोलाहल मच गया। धरती की धूल उड़कर ऊँचे आकाश में फैल गई। शंख, नगाड़े और ढोल की तेज़ ध्वनियाँ सर्वत्र गूँज उठीं। बैलों, घोड़ों, रथों, हाथियों और पैदल सैनिकों की ध्वनि सर्वत्र फैल गई।
 
This created a huge uproar at that time. The dust of the earth flew and spread into the high sky. The loud sounds of conches, drums and kettledrums echoed everywhere. The sound of bulls, horses, chariots, elephants and foot soldiers spread everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)