श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 31: चारों पाण्डवोंसहित राजा विराटकी सेनाका युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  4.31.22-23 
एतेषामपि दीयन्तां रथा ध्वजपताकिन:।
कवचानि च चित्राणि दृढानि च मृदूनि च॥ २२॥
प्रतिमुञ्चन्तु गात्रेषु दीयन्तामायुधानि च।
वीराङ्गरूपा: पुरुषा नागराजकरोपमा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अतः उन्हें ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित रथ दो। उनके शरीर पर विचित्र कवच भी पहनाओ जो बाहर से दृढ़ किन्तु भीतर से कोमल हों। फिर उन्हें सब प्रकार के अस्त्र-शस्त्र प्रदान करो। उनके शरीर और रूप वीरतापूर्ण प्रतीत होते हैं। इन वीर पुरुषों की भुजाएँ हाथी की सूँड़ के समान सुन्दर लगती हैं॥ 22-23॥
 
‘Therefore give them chariots decorated with flags and banners. They should also wear strange armour on their bodies which is strong from outside but soft from inside. Then offer them all kinds of weapons. Their bodies and appearance look heroic. The arms of these brave men look beautiful like the trunk of an elephant.॥ 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)