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श्लोक 4.30.9  |
आददामोऽस्य रत्नानि विविधानि वसूनि च।
ग्रामान् राष्ट्राणि वा तस्य हरिष्यामो विभागश:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| ‘राजा विराट के पास अनेक प्रकार के रत्न और धन हैं। हम उन सबको ले लेंगे और उनके गाँव तथा सम्पूर्ण राष्ट्र को जीतकर आपस में बाँट लेंगे।॥9॥ |
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| ‘King Virata has many kinds of gems and wealth. We will take them all and after conquering his village and the whole nation, we will divide it amongst ourselves.॥ 9॥ |
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