vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 30: सुशर्माके प्रस्तावके अनुसार त्रिगर्तों और कौरवोंका मत्स्यदेशपर धावा
»
श्लोक 7
श्लोक
4.30.7
तत्र यात्रा मम मता यदि ते रोचतेऽनघ।
कौरवाणां च सर्वेषां कर्णस्य च महात्मन:॥ ७॥
अनुवाद
अनघ! यदि तुम्हें उचित लगे तो मेरी सलाह है कि समस्त कौरव योद्धाओं तथा महाबली कर्ण को भी उस देश पर आक्रमण कर देना चाहिए।
Anagh! If it suits you, then my advice is that all the Kaurava warriors and the great Karna should also attack that country.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×