श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 30: सुशर्माके प्रस्तावके अनुसार त्रिगर्तों और कौरवोंका मत्स्यदेशपर धावा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.30.27 
अपरे दिवसे सर्वे राजन् सम्भूय कौरवा:।
अष्टम्यां ते न्यगृह्णन्त गोकुलानि सहस्रश:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! फिर अगले दिन अर्थात् आठवें दिन सभी कौरवों ने मिलकर दूसरी ओर से आक्रमण कर दिया और हजारों गायों के झुंडों पर कब्ज़ा कर लिया।
 
King! Then on the next day, i.e., the eighth day, all the Kauravas together attacked from the other side and captured thousands of herds of cows.
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि दक्षिणगोग्रहे सुशर्माभियाने त्रिंशोऽध्याय:॥ ३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें दक्षिणदिशाकी गौओंको ग्रहण करनेके लिये सुशर्मा आदिकी मत्स्यदेशपर चढ़ाईसे सम्बन्ध रखनेवाला तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd