श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 30: सुशर्माके प्रस्तावके अनुसार त्रिगर्तों और कौरवोंका मत्स्यदेशपर धावा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.30.13 
तं वशे न्यायत: कृत्वा सुखं वत्स्यामहे वयम्।
भवतां बलवृद्धिश्च भविष्यति न संशय:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘हम लोग युक्ति से विराट को वश में करके सुखपूर्वक रहेंगे। इससे तुम्हारी सेना और शक्ति भी बढ़ेगी; इसमें संशय नहीं है।’॥13॥
 
‘We will live happily after subduing Virata with strategy. This will also increase your army and power; there is no doubt about this.'॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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