श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 30: सुशर्माके प्रस्तावके अनुसार त्रिगर्तों और कौरवोंका मत्स्यदेशपर धावा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.30.12 
संविभागेन कृत्वा तु निबध्नीमोऽस्य पौरुषम्।
हत्वा चास्य चमूं कृत्स्नां वशमेवानयामहे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘और हम लोग आपस में फूट डालकर उन्हें यहीं बाँध लेंगे। साथ ही मत्स्यराज की शक्ति को नष्ट करके उसकी सम्पूर्ण सेना को अपने अधीन कर लेंगे।॥12॥
 
‘And we will divide ourselves among ourselves and tie them up here. Also, we will destroy the power of Matsyaraj and bring his entire army under our control.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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