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श्लोक 4.30.10  |
अथवा गोसहस्राणि शुभानि च बहूनि च।
विविधानि हरिष्याम: प्रतिपीडॺ पुरं बलात्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘अथवा उनके पास हजारों सुन्दर गौओं के समूह हैं; इसलिए हम उनके नगर में उत्पात मचाएँगे और उन सब गौओं को बलपूर्वक हरण कर लेंगे ॥10॥ |
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| ‘Or they have many groups of thousands of beautiful cows; therefore we will create havoc in their city and kidnap all those cows by force.॥ 10॥ |
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