श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 30: सुशर्माके प्रस्तावके अनुसार त्रिगर्तों और कौरवोंका मत्स्यदेशपर धावा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.30.1 
वैशम्पायन उवाच
अथ राजा त्रिगर्तानां सुशर्मा रथयूथप:।
प्राप्तकालमिदं वाक्यमुवाच त्वरितो बली॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! तत्पश्चात् रथियों के सेनापति, त्रिगर्त के पराक्रमी राजा सुशर्मा ने बड़ी शीघ्रता से अपना समयानुकूल प्रस्ताव प्रस्तुत किया ॥1॥
 
Vaishmpayana says: O Janamejaya! Thereafter the mighty King of Trigarta, Susarma, who was the commander of the group of charioteers, very hastily presented his timely proposal. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)