Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.3.14-15: युधिष्ठिर बोले - "यह द्रुपद की पुत्री कृष्णा हमारी प्रिय पत्नी है। इसका सम्मान हमारे लिए प्राणों से भी अधिक प्रिय है। यह माता (पृथ्वी) के समान पालन-पोषण योग्य है और बड़ी बहन (गाय) के समान आदरणीय है। यह अन्य स्त्रियों के समान कोई काम नहीं जानती; फिर यह किस काम से वहाँ रहेगी?"॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 4.3: नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीद्वारा अपने-अपने भावी कर्तव्योंका दिग्दर्शन । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
इयं हि न: प्रिया भार्या प्राणेभ्योऽपि गरीयसी।
मातेव परिपाल्या च पूज्या ज्येष्ठेव च स्वसा॥ १४॥
केन स्म द्रौपदी कृष्णा कर्मणा विचरिष्यति।
न हि किञ्चिद् विजानाति कर्म कर्तुं यथा स्त्रिय:॥ १५॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "यह द्रुपद की पुत्री कृष्णा हमारी प्रिय पत्नी है। इसका सम्मान हमारे लिए प्राणों से भी अधिक प्रिय है। यह माता (पृथ्वी) के समान पालन-पोषण योग्य है और बड़ी बहन (गाय) के समान आदरणीय है। यह अन्य स्त्रियों के समान कोई काम नहीं जानती; फिर यह किस काम से वहाँ रहेगी?"॥14-15॥
Yudhishthira said, "This Krishna, daughter of Drupada, is our beloved wife. Her honour is more precious to us than our lives. She is worthy of being nurtured like a mother (earth) and is respected like an elder sister (cow). She does not know any work like other women; then by which work will she live there?"॥14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥