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mahabharat 4.3.10: हे राजन! पहले आपने मुझे सदैव गौओं की देखभाल का कार्य सौंपा था। आप जानते ही हैं कि मैं इस कार्य में कितना निपुण हूँ॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 4.3: नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीद्वारा अपने-अपने भावी कर्तव्योंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 3: नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीद्वारा अपने-अपने भावी कर्तव्योंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.3.10 
अहं हि सततं गोषु भवता प्रहित: पुरा।
तत्र मे कौशलं सर्वमवबुद्धं विशाम्पते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! पहले आपने मुझे सदैव गौओं की देखभाल का कार्य सौंपा था। आप जानते ही हैं कि मैं इस कार्य में कितना निपुण हूँ॥ 10॥
 
O king! Earlier you had always assigned me the task of looking after the cows. You already know how proficient I am in this task.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)