श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 29: कृपाचार्यकी सम्मति और दुर्योधनका निश्चय  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.29.14 
एवं सर्वं विनिश्चित्य व्यवसायं स्वधर्मत:।
यथाकालं मनुष्येन्द्र चिरं सुखमवाप्स्यसि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! यदि तुम अपने धर्मानुसार अपने समस्त कर्तव्यों का निश्चय करोगे और उचित समय पर उनका पालन करोगे, तो तुम दीर्घकाल तक सुख भोगोगे।॥14॥
 
Narendra! If you decide on all your duties in accordance with your religion and follow them at the right time, you will enjoy happiness for a long time.'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)