श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 27: आचार्य द्रोणकी सम्मति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.27.10 
विज्ञाय क्रियतां तस्माद् भूयश्च मृगयामहे।
ब्राह्मणैश्चारकै: सिद्धैर्ये चान्ये तद्विदो जना:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अतः हमें इन बातों पर भली-भाँति विचार करके ही कोई कार्य करना चाहिए। ब्राह्मणों, गुप्तचरों, सिद्धपुरुषों अथवा अन्य जानकारों से इनकी पुनः जाँच करवानी चाहिए।॥10॥
 
‘Therefore we should do any work only after thinking these things through properly. We should have them searched again by Brahmins, spies, Siddha Purushas or other people who know them.’॥10॥
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि द्रोणवाक्ये चारप्रत्याचारे सप्तविंशोऽध्याय:॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें द्रोणवाक्य एवं गुप्तचर भेजनेसे सम्बन्ध रखनेवाला सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)