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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 26: दुर्योधनका सभासदोंसे पाण्डवोंका पता लगानेके लिये परामर्श तथा इस विषयमें कर्ण और दु:शासनकी सम्मति
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श्लोक 8
श्लोक
4.26.8
अथाब्रवीत् तत: कर्ण: क्षिप्रं गच्छन्तु भारत।
अन्ये धूर्ता नरा दक्षा निभृता: साधुकारिण:॥ ८॥
अनुवाद
यह सुनकर कर्ण ने कहा, 'हे भरतपुत्र! फिर तुम अन्य योग्य गुप्तचरों को भेजो, जो चतुर होने के साथ-साथ छिपे रहकर भी अपना काम अच्छी तरह कर सकें।'
On hearing this, Karna said, 'O son of Bharata! Then send other capable spies, who, besides being cunning, can remain hidden and do their work well.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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