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mahabharat 4.25.d5-d6h: हे मनुष्यों के स्वामी! वह दुष्ट कीचक क्रोध में भरा हुआ, एक स्त्री के कारण गन्धर्वों द्वारा आधी रात में अपने भाइयों सहित मारा गया है। उसके प्रिय मित्र और श्रेष्ठ सैनिक भी मारे गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 4.25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक d5-d6h
 
 
श्लोक  4.25.d5-d6h 
स हतो निशि गन्धर्वै: स्त्रीनिमित्तं नराधिप।
अमृष्यमाणो दुष्टात्मा निशीथे सह सोदरै:॥
सुहृदश्चास्य निहता योधाश्च प्रवरा हता:।)
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! वह दुष्ट कीचक क्रोध में भरा हुआ, एक स्त्री के कारण गन्धर्वों द्वारा आधी रात में अपने भाइयों सहित मारा गया है। उसके प्रिय मित्र और श्रेष्ठ सैनिक भी मारे गए हैं।
 
O Lord of men! That wicked Keechak, full of anger, has been killed along with his brothers by the Gandharvas in the middle of the night because of a woman. His dear friends and best soldiers have also been killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)