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mahabharat 4.25.9: गुप्तचरों ने कहा - नरेन्द्र! उस विशाल वन में पाण्डवों की खोज के लिए हम सदैव प्रयत्नशील रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 4.25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.25.9 
चरा ऊचु:
कृतोऽस्माभि: परो यत्नस्तेषामन्वेषणे सदा।
पाण्डवानां मनुष्येन्द्र तस्मिन् महति कानने॥ ९॥
 
 
अनुवाद
गुप्तचरों ने कहा - नरेन्द्र! उस विशाल वन में पाण्डवों की खोज के लिए हम सदैव प्रयत्नशील रहे हैं।
 
The spies said - Narendra! We have always continued our great efforts to search for the Pandavas in that vast forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)