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mahabharat 4.25.5-6: इधर, दुर्योधन ने जो गुप्तचर पाण्डवों को वनवास के समय ढूँढ़ने के लिए नियुक्त किए थे, वे अनेक ग्रामों, राज्यों और नगरों में उनकी खोज करके, जहाँ तक वे देख या पता लगा सकते थे, वहाँ उनकी देखभाल करके, या जिन देशों में भी वे खोजबीन कर सकते थे, वहाँ अपना कार्य पूरा करके हस्तिनापुर लौट आए ॥5-6॥   |   mahabharat अध्याय 4.25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  4.25.5-6 
अथ वै धार्तराष्ट्रेण प्रयुक्ता ये बहिश्चरा:।
मृगयित्वा बहून् ग्रामान् राष्ट्राणि नगराणि च॥ ५॥
संविधाय यथादृष्टं यथादेशप्रदर्शनम्।
कृतकृत्या न्यवर्तन्त ते चरा नगरं प्रति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इधर, दुर्योधन ने जो गुप्तचर पाण्डवों को वनवास के समय ढूँढ़ने के लिए नियुक्त किए थे, वे अनेक ग्रामों, राज्यों और नगरों में उनकी खोज करके, जहाँ तक वे देख या पता लगा सकते थे, वहाँ उनकी देखभाल करके, या जिन देशों में भी वे खोजबीन कर सकते थे, वहाँ अपना कार्य पूरा करके हस्तिनापुर लौट आए ॥5-6॥
 
Here, the spies who had been deployed by Duryodhana to search for the Pandavas during their exile, after searching for them in several villages, states and cities, after taking care of them in as much as they could see or find out or in whatever countries they could investigate, after completing their task, returned back to Hastinapur. ॥5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)