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mahabharat 4.25.17-18: ऐसा प्रतीत होता है कि वे पूर्णतः नष्ट हो गए हैं। हे भरतश्रेष्ठ! आपको नमस्कार है। हम महान पाण्डवों के मार्ग, निवास, स्वभाव या कार्य के विषय में कुछ भी जानकारी प्राप्त नहीं कर सके। हे प्रजापालक राजा! इसके बाद हमारे लिए क्या आदेश है?॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 4.25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  4.25.17-18 
सर्वथा विप्रणष्टास्ते नमस्ते भरतर्षभ।
न हि विद्मो गतिं तेषां वासं वापि महात्मनाम्॥ १७॥
पाण्डवानां प्रवृत्तिं च विद्म: कर्मापि वा कृतम्।
स न: शाधि मनुष्येन्द्र अत ऊर्ध्वं विशाम्पते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रतीत होता है कि वे पूर्णतः नष्ट हो गए हैं। हे भरतश्रेष्ठ! आपको नमस्कार है। हम महान पाण्डवों के मार्ग, निवास, स्वभाव या कार्य के विषय में कुछ भी जानकारी प्राप्त नहीं कर सके। हे प्रजापालक राजा! इसके बाद हमारे लिए क्या आदेश है?॥17-18॥
 
It seems; they have been completely destroyed. O best of the Bharatas! Salutations to you. We could not get any information about the path, residence, nature or work done by the great Pandavas. O king who protects his subjects! What is the order for us after this?॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)