श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.25.16 
प्राप्ता द्वारवतीं सूता विना पार्थै: परंतप।
न तत्र कृष्णा राजेन्द्र पाण्डवाश्च महाव्रता:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को संताप देने वाले राजन! पाण्डवों के सारथी इन्द्रसेन आदि उसके बिना ही द्वारकापुरी पहुँच गए हैं। न तो द्रौपदी वहाँ है और न ही महान व्रतधारी पाण्डव ही वहाँ हैं॥16॥
 
O King, who torments the enemies! The Pandavas' charioteers Indrasen and others have reached Dwarkapuri without him. Neither Draupadi is there nor the Pandavas who are observing great vows.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)