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mahabharat 4.25.14: हे रथियों में श्रेष्ठ, हे नरोत्तमश्रेष्ठ! हमने रथियों के मार्ग में उनकी खोज की है, परंतु वे कहाँ गए और कहाँ रहते हैं? हम पता नहीं लगा सके॥14॥   |   mahabharat अध्याय 4.25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.25.14 
वर्त्मन्यन्वेष्यमाणा वै रथिनां रथिसत्तम।
न हि विद्मो गतिं तेषां वासं हि नरसत्तम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे रथियों में श्रेष्ठ, हे नरोत्तमश्रेष्ठ! हमने रथियों के मार्ग में उनकी खोज की है, परंतु वे कहाँ गए और कहाँ रहते हैं? हम पता नहीं लगा सके॥14॥
 
O best of all charioteers, O best of Narottama! We have searched for him on the path of charioteers, but where did he go and where does he live? We could not find out. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)