Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.25.10-11: उस निर्जन वन में, जो मृगों से भरा हुआ था, जो अनेक वृक्षों और लताओं से आच्छादित था, जो नाना प्रकार की लताओं से युक्त था, जो दूर-दूर तक फैला हुआ था और नाना प्रकार की झाड़ियों से आच्छादित था, हम लोग नाना स्थानों में घूमते रहे और नाना प्रकार से उसके पदचिह्नों की खोज करते रहे। परन्तु हम यह न जान सके कि वह बलवान और पराक्रमी कुन्तीपुत्र किस मार्ग से गया था? ॥10-11॥ | mahabharat अध्याय 4.25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निर्जने मृगसंकीर्णे नानाद्रुमलताकुले।
लताप्रतानबहुले नानागुल्मसमावृते॥ १०॥
न च विद्मो गता येन पार्था: सुदृढविक्रमा:।
मार्गमाणा: पदन्यासं तेषु तेषु तथा तथा॥ ११॥
अनुवाद
उस निर्जन वन में, जो मृगों से भरा हुआ था, जो अनेक वृक्षों और लताओं से आच्छादित था, जो नाना प्रकार की लताओं से युक्त था, जो दूर-दूर तक फैला हुआ था और नाना प्रकार की झाड़ियों से आच्छादित था, हम लोग नाना स्थानों में घूमते रहे और नाना प्रकार से उसके पदचिह्नों की खोज करते रहे। परन्तु हम यह न जान सके कि वह बलवान और पराक्रमी कुन्तीपुत्र किस मार्ग से गया था? ॥10-11॥
In that deserted forest, which was full of deer and which was covered with numerous trees and creepers, which was full of various creepers and was spread out and covered with various bushes, we roamed around in various places and searched for his footprints in various ways. But we could not find out which route did that strong and valiant son of Kunti go? ॥10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥