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mahabharat 4.25.1: हे मनुष्यों के स्वामी! जब कीचक अपने भाइयों सहित मारा गया, तब सब लोग इसे महान दुर्भाग्य अथवा साहस का कार्य समझकर अपने-अपने ढंग से आश्चर्यचकित हो गए॥1॥   |   mahabharat अध्याय 4.25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.25.1 
कीचकस्य तु घातेन सानुजस्य विशाम्पते।
अत्याहितं चिन्तयित्वा व्यस्मयन्त पृथग् जना:॥ १॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जब कीचक अपने भाइयों सहित मारा गया, तब सब लोग इसे महान दुर्भाग्य अथवा साहस का कार्य समझकर अपने-अपने ढंग से आश्चर्यचकित हो गए॥1॥
 
O lord of men! When Keechak along with his brothers were killed, everybody considered this to be a great misfortune or an act of daring and were astonished in their own ways. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)