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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 24: द्रौपदीका राजमहलमें लौटकर आना और बृहन्नला एवं सुदेष्णासे उसकी बातचीत
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श्लोक 5
श्लोक
4.24.5
यथा सैरन्ध्रिदोषेण न ते राजन्निदं पुरम्।
विनाशमेति वै क्षिप्रं तथा नीतिर्विधीयताम्॥ ५॥
अनुवाद
"अतः हे राजन! आप शीघ्र ही ऐसी नीति अपनाएँ, जिससे सैरन्ध्री के दोष से आपका नगर नष्ट न हो जाए।" ॥5॥
"Therefore, O King! You should quickly adopt such a policy that your city may not be destroyed due to the fault of Sairandhri." ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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