श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 24: द्रौपदीका राजमहलमें लौटकर आना और बृहन्नला एवं सुदेष्णासे उसकी बातचीत  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.24.23 
बृहन्नलोवाच
बृहन्नलापि कल्याणि दु:खमाप्नोत्यनुत्तमम्।
तिर्यग्योनिगता बाले न चैनामवबुध्यसे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
बृहन्नला बोली - कल्याणी ! बृहन्नला भी पशु के समान नीच या नपुंसक योनि में जन्म लेकर महान दुःख भोग रही है । तुम अभी अबोध हो, इसीलिए बृहन्नला को समझ नहीं पा रही हो ॥ 23॥
 
Brihannala said - Kalyani! Brihannala too is suffering a lot after being born in a low or impotent form like that of an animal. You are still innocent and that is why you are unable to understand Brihannala.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)