श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.23.34 
तद् दृष्ट्वा महदाश्चर्यं नरा नार्यश्च संगता:।
विस्मयं परमं गत्वा नोचु: किञ्चन भारत॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
भरत! उस समय श्मशान में बहुत से स्त्री-पुरुष एकत्रित हुए थे। उन सबने यह महान् आश्चर्यजनक घटना देखी, किन्तु अत्यन्त विस्मित होने के कारण कोई भी कुछ नहीं बोला।
 
Bharat! At that time many men and women had gathered at the cremation ground. All of them saw this great and astonishing incident, but being in great astonishment no one said anything.
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि कीचकवधपर्वणि त्रयोविंशोऽध्याय:॥ २३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत कीचकवधपर्वमें तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)