सर्वे संहृष्टरोमाण: संत्रस्ता: प्रेक्ष्य कीचकम्।
तथा सम्भिन्नसर्वाङ्गं कूर्मं स्थल इवोद्धृतम्॥ २॥
अनुवाद
उसके सारे अंग उसके शरीर में धँस गए थे, जिससे वह जल से निकालकर भूमि पर रखे हुए कछुए के समान जान पड़ता था। कीचक के शव की दुर्दशा देखकर वे सब काँप उठे और उनके रोंगटे खड़े हो गए॥2॥
All his limbs had sunk into his body, so he looked like a tortoise taken out of water and placed on land. Seeing the plight of Keechak's corpse, they all trembled and their hair stood on end.॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)