श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.23.16 
भीमसेन उवाच
अहं शृणोमि ते वाचं त्वया सैरन्ध्रि भाषिताम्।
तस्मात् ते सूतपुत्रेभ्यो भयं भीरु न विद्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले- सैरन्ध्री! तुम जो कुछ कह रही हो, वह मैं सुन रहा हूँ। इसीलिए तुम डरी हुई हो! अब तुम्हें इन सारथिपुत्रों से कोई भय नहीं है।
 
Bhimsen said- Sairandhri! I am hearing whatever you are saying. That is why you are timid! Now you have no fear from these sons of charioteer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)