श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.23.1 
वैशम्पायन उवाच
तस्मिन् काले समागम्य सर्वे तत्रास्य बान्धवा:।
रुरुदु: कीचकं दृष्ट्वा परिवार्य समन्तत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! यह समाचार पाकर कीचक के सभी सम्बन्धी वहाँ आ गए। कीचक की यह दशा देखकर उन्होंने उसे चारों ओर से घेर लिया और विलाप करने लगे।
 
Vaishampayana says- Janamejaya! On receiving this news, all the relatives of Keechak came there. Seeing this condition of Keechak, they surrounded him from all sides and started lamenting. 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)