श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  4.22.94 
अमानुषं कृतं कर्म तं दृष्ट्वा विनिपातितम्।
क्वास्य ग्रीवा क्व चरणौ क्व पाणी क्व शिरस्तथा।
इति स्म तं परीक्षन्ते गन्धर्वेण हतं तदा॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
जब उन्होंने कीचक को इस प्रकार मारा हुआ देखा, तो वे आपस में कहने लगे, "यह कार्य किसी मनुष्य द्वारा नहीं किया गया होगा। देखो, इसकी गर्दन, हाथ, पैर, सिर आदि कहाँ गए हैं?" ऐसा कहकर जब उन्होंने उसकी जाँच की, तो वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि इसे अवश्य ही किसी गन्धर्व ने मारा होगा।
 
When they saw Keechak killed in this manner, they said to each other, "This act cannot have been done by a human being. See where his neck, hands, legs, head etc. have gone?" Saying this, when they examined him, they came to the conclusion that he must have been killed by a Gandharva. 94.
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि कीचकवधपर्वणि कीचकवधे द्वाविंशोऽध्याय:॥ २२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत कीचकवधपर्वमें कीचकवधविषयक बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ९६ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)