श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  4.22.93 
पाणिपादविहीनं तु दृष्ट्वा च व्यथिताऽभवन्।
निरीक्षन्ति तत: सर्वे परं विस्मयमागता:॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
वे सब उसे अंगहीन देखकर बहुत दुःखी हुए और आश्चर्यचकित होकर ध्यानपूर्वक देखने लगे॥93॥
 
They were all very sad to see him without limbs. Then they were all astonished and began to look at him attentively.॥93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)