श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  4.22.79 
अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातुर्भार्यापहारिणम्।
शान्तं लब्धास्मि परमां हत्वा सैरन्ध्रिकण्टकम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
जो सैरन्ध्री के लिए काँटा था और जिसने मेरे भाई की पत्नी का अपहरण करने का प्रयत्न किया था, उस दुष्ट कीचक को मारकर मैं आज अपने ऋण से मुक्त हो जाऊँगा और महान शान्ति प्राप्त करूँगा॥ 79॥
 
By killing that evil Keechak who was a thorn for Sairandhri and who tried to abduct my brother's wife, I shall today be free of my debt and shall attain great peace.'॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)