श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  4.22.68 
ततस्तद् भवनं श्रेष्ठं प्राकम्पत मुहुर्मुहु:।
बलवच्चापि संक्रुद्धावन्योन्यं प्रति गर्जत:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
इससे वह विशाल भवन बार-बार हिलने लगा। दोनों योद्धा अत्यन्त क्रोध से भरकर एक-दूसरे पर जोर-जोर से दहाड़ने लगे।
 
Due to this the huge building kept shaking again and again. Both the warriors were filled with great anger and were roaring loudly at each other. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)