श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 22: कीचक और भीमसेनका युद्ध तथा कीचकवध  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  4.22.60 
अभिपत्याथ बाहुभ्यां प्रत्यगृह्णादमर्षित:।
मातङ्ग इव मातङ्गं प्रभिन्नकरटामुखम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
जैसे क्रोध में भरा हुआ हाथी अपने माथे से मदिरा टपकाते हुए दूसरे हाथी को अपनी सूँड़ से पकड़ लेता है, उसी प्रकार क्रोध में भरा हुआ कीचक अचानक भीमसेन पर झपटा और उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया।
 
Just as an elephant filled with anger seizes another elephant with its trunk, with wine dripping from its forehead, so Kichaka, filled with rage, suddenly pounced upon Bhimasena and seized him with both hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)